बिहार में ‘भगवान’ सुरक्षित नहीं!

बिहार में ‘भगवान’ सुरक्षित नहीं!

पटना / मनोज पाठक

बिहार में मंदिरों की सुरक्षा को लेकर भी प्रश्न खड़े किए जाने लगे हैं। जमुई जिले में 2600 वर्ष पुरानी भगवान महावीर की मूर्ति चोरी का मामला अभी तक पूरी तरह सुलझा भी नहीं है कि राज्य के अन्य क्षेत्रों के मंदिरों से चोर मूर्तियां उड़ा रहे हैं। बिहार की मंदिरों से लगातार हो रही कीमती और प्राचीन मूर्तियों की चोरी की घटनाओं से मंदिरों के संरक्षण की जरूरत महसूस की जाने लगी है।

पिछले तीन महीने के अंदर बिहार के मंदिरों से कम से कम 20 मूर्तियों की चोरी की घटनाएं घटी हैं। जमुई जिले के खैरा क्षेत्र के जन्मस्थली मंदिर से 27 नवंबर को भगवान महावीर की एक प्रतिमा चोरी हो गई थी। यह प्रतिमा लगभग 2,600 साल पुरानी बताई जाती है। बाद में हालांकि सिकंदरा थाना के बिछवे गांव के एक झाड़ी से 24वें र्तीथकर भगवान महावीर की बहुमूल्य मूर्ति बरामद कर ली गई।

इस मामले को लेकर अभी पुलिस जांच में ही जुटी थी कि राज्य पुलिस को एक बार फिर से मूर्ति चोरों ने चुनौती देते हुए 15 दिसम्बर और 16 दिसम्बर को राज्य के चार मंदिरों पर धावा बोलकर कई प्राचीन मूर्तियों समेत लाखों रुपये मूल्य के जेवरात चोरी कर लिए।

राज्य के औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मरही गांव स्थित एक मंदिर से 16 दिसंबर की रात अज्ञात चोरों ने दो प्राचीन मूर्तियां चोरी कर ली। जिले के मरही गांव स्थित मंदिर से अज्ञात चोरों ने करीब चार फीट की मां शिववाहिनी और दो फीट की भौरों बाबा की मूर्ति चोरी कर ली।

मुजफ्फरपुर जिले में वरीय पुलिस अधीक्षक आवास से सटे सिकंदरपुर स्थित काली मंदिर से चोरों ने सभी गहने चोरी कर लिए। चोरों ने काली मंदिर से पांच किलो का चांदी का छत्र, गले की माला और मुकुट की चोरी की है। इन गहनों की कीमत पांच लाख रुपये से अधिक बताई गई।

करीब 83 वर्ष पुराने इस मंदिर की स्थापना दरभंगा महाराज कमेश्वर सिंह ने वर्ष 1932 में की थी।

इधर, सीतामढ़ी जिले के परिहार थाना क्षेत्र के परसा गांव स्थित रामजानकी मंदिर से चोरों ने 15 दिसंबर की रात अष्टधातु निर्मित लाखों रुपये मूल्य की बेशकीमती मूर्ति चोरी कर ली, वहीं राजधानी पटना के पटना सिटी इलाके के सदर गली स्थित एक मंदिर से अज्ञात अपराधियों ने लाखों रुपये मूल्य के जेवरात चोरी कर लिए।

इससे पहले 10 दिसंबर को रोहतास जिले के विक्रमगंज थाना क्षेत्र के शिवपुर गांव स्थित एक मंदिर से चोरों ने अष्टधातु की दो मूर्तियां चुरा ली और फरार हो गए।

वैसे ऐसा नहीं की बिहार में मूर्ति चोरी की घटनाएं कोई नई बात है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षो के दौरान राज्य में 200 से ज्यादा ऐतिहासिक मूर्तियों की चोरी हो चुकी है।

वैसे एक पुलिस अधिकारी नाम जाहिर न करने की शर्त पर यह भी स्वीकार करते हैं कि कई मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते, यानी मामले ही दर्ज नहीं होते।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 में जहां 30 कीमती और ऐतिहासिक मूर्तियों की चोरी हुई थी, वहीं वर्ष 2012 में 62 मूर्तियों को चोरों ने उड़ा लिए थे। इसी तरह वर्ष 2013 में 65 मूर्तियों पर चोरों ने हाथ साफ किए, जबकि वर्ष 2014 में 28 मूर्ति चोरी की घटनाएं प्रकाश में आईं।

इधर, राज्य के पुलिस मुख्यालय मूर्ति तस्करों और चोरों के खिलाफ कारवाई करने की बात कर रही है। पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी बताते हैं कि तस्करों और मूर्ति चोरों के खिलाफ अब स्पीडी ट्रायल करा कर सजा दिलवाई जाएगी। इसके अलावा ऐसे मामले के अनुसंधान अब आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) को सौंपा जाएगा।

ईओयू के पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र सिंह गंगवार कहते हैं कि सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इस आदेश का पत्र भेज दिया गया है। तस्करों के नेटवर्क का पता करना और उन्हें गिरफ्तार करना प्राथमिकता होगी।

बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष किशोर कुणाल कहते हैं कि कई बार सरकार को पत्र लिखकर कीमती मूर्तियों वाले मंदिरों में चाहरदीवारी बनाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कारगर पहल नहीं की गई है। वह कहते हैं कि बिहार के कई मंदिर ऐसे हैं, जहां मूर्तियां तो काफी महंगी हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजाम काफी कमजोर है।

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